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1/24/26

पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज की मनाई गई 122वीं जयंती मौके पर काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन!


पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज की मनाई गई 122 वीं जयंती मौके पर काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन!


पूर्णिया कॉलेज के प्रथम प्राचार्य और प्रसिद्ध साहित्यकार पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज की 122 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। शहर के कलाभवन स्थित साहित्य विभाग में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रथम लोकपाल डॉ शिवमुनि यादव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।


मुख्य अतिथि के रूप में कला भवन के उपाध्यक्ष डॉ देवी राम, विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रियव्रत नारायण सिंह, पूर्णिया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष कामेश्वर पंकज ,पूर्णियां कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ शंभू लाल वर्मा कुशाग्र, महिला कॉलेज की प्रोफेसर डॉ उषा शरण, प्रोफेसर विजया रानी कला भवन साहित्य विभाग की संयोजिका कथाकार और द्विज जी की नतिनी डॉ निरुपमा राय मंचासीन थी। मंच संचालन बबिता चौधरी ने किया।



आगत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर पंडित जी को नमन किया। पहले सत्र में पंडित जी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। इसके बाद कवि सम्मेलन का में कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। डॉ निरुपमा राय ने कहा कि पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज नियम के पाबंद एक प्रखर वक्ता, उद्भट साहित्य कार थे। उन्होंने कहा कि इनकी रचना मैट्रिक तक जरूर पढ़ाया जाय जिससे बच्चों में एक अनुशासन शिक्षा के प्रति लगाव होता है वो जागृत होगा। इन सबमें हम धीरे धीरे आगे बढ़ेंगे। आगे की पीढ़ी को हम तैयार करेंगे जिससे यहां के युवा कवि को जाने समझे और पढ़ें ताकि यह सिलसिला निरंतर चलता रहे। साहित्य में उनका क्या योगदान रहा यह युवाओं को बताना होगा।


साहित्यकार डॉ निशा प्रकाश ने कहा कि पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज पूर्णियां के धरती के लाल हैं। ये कालजयी कवि हैं। कला भवन इन्हें याद कर अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि युवा देश विदेश के कवि को जानते हैं मगर अफसोस की बात है कि यहां के बच्चे पूर्णियां के कवि का नाम तक नहीं जानते हैं ये हमारे लिए दुख की बात है‌। स्कूल कालेज में सभी जगह इस तरह प्रयास किया जाय तो पुनः इन्हें स्मरण में ला सकते हैं। 



कला भवन के उपाध्यक्ष डॉ देवी राम ने कहा कि पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज महान साहित्यकार थे इन्होंने साहित्य के माध्यम से पूर्णियां का नाम रोशन किया। इस मौके पर द्विज जी की दौहित्री शल्या झा, विजय श्रीवास्तव, डॉ केके चौधरी, यमुना प्रसाद बसाक, डॉक्टर किशोर कुमार यादव, गिरीश कुमार सिंह मीणा सिंह, डॉक्टर ज्ञान कुमारी राय, सरिता झा, शौर्य राय, रीना सिंह, दिव्या त्रिवेदी , वंदना कुमारी, हरे कृष्ण प्रकाश, सुनील समदर्शी, रंजीत तिवारी सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी कवियों के अपनी काव्य प्रस्तुति दी


पूर्णियां विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ कामेश्वर पंकज ने कहा कि द्विज जी हिंदी छायावाद युग के भावुक कवि, कहानीकार आलोचक, शिक्षाविद बेहद अनुशासन प्रिय और ओजस्वी वक्ता थे। 1948 से लेकर 1964 तक पूर्णियां कॉलेज के प्रिंसिपल रहे। इनकी प्रसिद्ध काव्य संग्रह अनुभुति, अंतर्ध्वनि है। कहानी के रूप में किसलय, मालिका, मधुमयी और मृदुदल प्रमुख हैं। ये विश्व वेदना के गायक के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने बताया कि बिहार के बाहर अन्य राज्यों में द्विज जी की कविता को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है मगर अभी तक बिहार के स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में क्या नहीं लिखना चाहिए और साहित्य में क्या लिखना चाहिए इसकी समझ युवाओं को नहीं है। हिंदी के पूर्वी विभागाध्यक्ष ने कहा कि युवाओं ने मोबाइल के दौर में पुस्तक से दूरी बना ली है जिसके कारण साहित्य को सही ढंग से समझ नहीं पा रहे हैं।


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