विशेष जानकारी पाएं

9/19/26

कौन सुने फ़रियाद - अश्क़ फतेहपुरी

 फ़रियाद :- अश्क़ फतेहपुरी

किससे उम्मीद रखिए यहाँ तीमारदारी की,

यहाँ सबको फिक्र है बस अपनी बीमारी की।

शाह भी हाजतमंद है इस शहर में,

कौन सुने फ़रियाद किसी भिखारी की।


अपने ही करे जब ख़ून रिश्तों का,

क्या जरूरत है किसी शिकारी की।

कोई कहाँ तक मोमिन रहे यहाँ,

हर तरफ़ शहर में चमक है हुस्ने बाज़ारी की।


पत्थरों के आँसू, हवा की सिसकियां,

फ़लक के नाले, अब्र ने आह ओ ज़ारी की।

अमीरों को समझते हैं क़ामयाब यहाँ पे,

क़ामयाब वो है जिसने मौत की तैयारी की।


पैसों का है सब खेल यहाँ पर,

ना क़ीमत ईमान की ना शर्म रिश्तेदारी की।

आँखो से निकल गये वो ~अश्क़~

जिन्होंने दिल में उम्र सारी की।


अश्क़ फतेहपुरी

No comments:

Post a Comment