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1/1/26

पानी जैसा बना लू मैं (कविता) - सुनीता बिश्नोई


शीर्षक -पानी जैसा


पानी जैसा बना लू मैं,

अपना जीवन,

किसी प्यासे जीव की प्यास,

को शांत कर पाऊ में,

देवी -देव के चरणों को धो पाऊं,मैं,

पौधों की करू सुरक्षा मै,

उनमें,नया जीवन भर दूं मैं,

नदी- समुद्र में बहकर में,

पंछी की प्यास बुझाऊ मैं,

बनाकर पानी के जैसा उतर पाऊं ,

 मन के भीतर में,

स्वच्छ निर्मल पानी सा,

अमल हृदय सा बन पाऊं में,

पानी जैसे सबकी चाहत में,

सबका मान बन पाऊं में,

पानी जैसे सौभाग्य को बना पाऊं मैं ।।

✍️ सुनीता बिश्नोई (राजस्थान)

स्वरचित एवं मौलिक और अप्रकाशित है।

धन्यवाद।

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