7/18/26

बस तुम ही तुम (कविता):- रंजीत कुमार पासवान

 


शीर्षक :- "बस तुम ही तुम" 

मेरी आंखों में तुम ,

मेरी नीदों में तुम, 

मेरी बातों में तुम ,

मेरे ख्वाबों में तुम ,


मेरी राहों में तुम ,

मेरी मंजिलों में तुम,

मेरी सांसों में तुम , 

मेरी आहों में तुम ,


मेरे दिल की धड़़कनों में तुम ,

मेरे दर्द के हर लम्हों में तुम ,

मेरे घर की तस्वीरों में तुम ,

मेरे घर के हर कोने में तुम,


रात की तन्हाइयों में तुम ,

प्रकाश की परछाइयों में तुम, 

सूरज की रौशनी में तुम,

चांद की चांदनी में तुम,


शाम में तुम , सुबह में तुम ,

नाम में तुम, काम में तुम,

  यहाॅं भी तुम,वहाँ भी तुम,

इधर भी तुम,उधर भी तुम ,

 

देखूं जहाँ भी,

हो सिर्फ बस तुम ही तुम 

 

      ✍️ - रंजीत कुमार पासवान 

       (भवानीपुर, पूर्णिया बिहार )




 


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