शीर्षक:- वो बस्ती :- साक्षी
मुझे उस बस्ती में जाना अब,
जहां कष्ट न हो अपराध न हो।
प्रेम सिवाय अन्य शब्द न हो,,
मुझे उस बस्ती में जाना अब।।
जहां त्याग न हो बलिदान न हो,
जहां लोगों का मुझ पर अधिकार न हो ।
जहां सबका मान समान हो,,
मुझे उस बस्ती में जाना अब।।
जहां जाति - धर्म का भेद न हो,
जहां झूठ न हो इल्जाम न हो।
अपराध का कोई कारण न हो,,
मुझे उस बस्ती में जाना अब।।
✍️ साक्षी
(सहरसा, बिहार)

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