शीर्षक :- "बस तुम ही तुम"
मेरी आंखों में तुम ,
मेरी नीदों में तुम,
मेरी बातों में तुम ,
मेरे ख्वाबों में तुम ,
मेरी राहों में तुम ,
मेरी मंजिलों में तुम,
मेरी सांसों में तुम ,
मेरी आहों में तुम ,
मेरे दिल की धड़़कनों में तुम ,
मेरे दर्द के हर लम्हों में तुम ,
मेरे घर की तस्वीरों में तुम ,
मेरे घर के हर कोने में तुम,
रात की तन्हाइयों में तुम ,
प्रकाश की परछाइयों में तुम,
सूरज की रौशनी में तुम,
चांद की चांदनी में तुम,
शाम में तुम , सुबह में तुम ,
नाम में तुम, काम में तुम,
यहाॅं भी तुम,वहाँ भी तुम,
इधर भी तुम,उधर भी तुम ,
देखूं जहाँ भी,
हो सिर्फ बस तुम ही तुम
✍️ - रंजीत कुमार पासवान
(भवानीपुर, पूर्णिया बिहार )
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