शीर्षक:- कुछ सब्र
कुछ राज रखो ,
कुछ खास रखो।
अगर हो सके ,,
कुछ अपने पास रखो।।
जीवन के उसे मोड पर ,
जहां कोई भी ना साथ हो।
उम्मीद रखो तुम ,,
तुम मजबूत रहो।।
अपने हर सवाल का,
आज ही जवाब दो ।
गैरों के विश्वास पर ,,
ना तुम कभी विश्वास रखो।।
मान नहीं, सम्मान नहीं ,
हो जहां कमजोर तुम ही।
उम्मीद रखो तुम ,,
उम्मीद रखो।।
कर्म जहां है ,
फल वहां है ।
आज नहीं तो कल ही सही,,
लेकिन अभी तो बस सब्र सही।।
साक्षी कुमारी ✍️
(सहरसा)
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