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8/17/26

तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूँ ( कविता) :- राखी राज

 माँ… तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूँ ❤️‍🩹

(सवचरित: राखी राज)

तुम्हारी तस्वीर को देखकर आज भी 

हाथ बढ़ जाता है, माँ,

फिर तस्वीर को छूकर दिल चुपचाप भर आता है।

तस्वीर को तो सीने से लगा सकती हूँ,

पर तुम्हें छूने को आज भी तरस जाती हूँ, माँ।


तुम कहती थीं—

“तू समझदार है, सब संभाल लेगी।”

तुमने तो मुझे दुनिया से लड़ना सिखा दिया,

पर अपने बिना जीना नहीं सिखाया, माँ।


तुम्हारे हाथों का वो प्यार अब कहाँ से लाऊँ,

तुम्हारी गोद जैसा सुकून अब कहाँ से पाऊँ?

मन टूटे तो किसके पास जाकर रोऊँ,

खुश होकर किसे सबसे पहले बताऊँ, माँ?


आज भी मन पूछता है—

मैंने कुछ कम तो नहीं किया, माँ?

तुम्हें बचाने में कहीं कोई पल कम तो नहीं दिया?

काश समय को वहीं रोक पाती,

काश अपनी उम्र देकर तुम्हारी उम्र बढ़ा पाती, माँ।


मेरे और पापा के हाथों में

तुम्हारा अंतिम प्राण गया, माँ।

हमने तुम्हें थामे रखा,

तुम्हारी साँसों को थामे रखना चाहा,

लेकिन तुम्हें रोक नहीं पाए,

वक्त को रोक नहीं पाए, माँ।


तुम चली गईं तो घर वही है,

मगर घर नहीं लगता।

सब अपने हैं,

मगर कोई तुम्हारे जैसा नहीं लगता।

आँखें बंद करती हूँ तो तुम सामने आ जाती हो,

आँखें खोलती हूँ तो बस तस्वीर रह जाती है, माँ।


हर रात तुम्हारी तस्वीर से पूछती हूँ—

तुम बिन किससे कहूँ अपने दिल की बात, माँ?


तुम्हारे जाने से

मैंने जीना तो सीख लिया है,

पर सच कहूँ—

हँसना अभी तक नहीं सीखा है।


एक सवाल आज भी अंदर से तोड़ देता है—

क्या मैंने तुम्हें बचाने की हर कोशिश की थी?

क्या मैं कुछ और कर सकती थी?

इन सवालों का जवाब शायद कभी नहीं मिलेगा, माँ।


बस एक बात समझ नहीं आती—

जिस माँ ने हमें जिंदगी भर संभाला,

उस माँ के जाने के बाद

हम खुद को कैसे संभालें?


काश, एक बार फिर

तुम हमें अपने पास बैठाकर कह दो—

“सब ठीक हो जाएगा…

मैं हूँ ना।”


क्योंकि सच तो यही है, माँ—

तुम थीं, इसलिए हम संभले हुए थे।

तुम चली गईं,

और हम आज भी तुम्हें ढूँढ रहे हैं।


मैं संभलने की कोशिश करूँगी, माँ,

ये तुमसे मेरा वादा है।

तुम्हारे दिए संस्कारों को निभाऊँगी,

तुम्हारा मान हमेशा रखूँगी, ये मेरा इरादा है।


तुम्हारे बिना जीना

शायद मेरी मजबूरी है, माँ,

पर तुम्हें भूल जाना

मेरे बस की बात नहीं।


मैं दुनिया के सामने मजबूत बनी रहूँगी,

लेकिन तुम्हारी याद में

हर दिन, हर रात

दिल से तुम्हें पुकारती रहूँगी।

माँ…

तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूँ। ❤️‍🩹

✍️ राखी राज 

( अररिया, बिहार)



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