शीर्षक:- जीवट जीवन का श्रृंगार
टुकड़ों में जीते हैं, टूटे हुए पीते हैं
टूटे हुए जीवन को टुके से सीते हैं
मन से जो रीते हैं कब जग जीते हैं
वीरों के दिन बस साहस से बीते हैं
पग नहीं डरते, कदम नहीं थकते
जीवन के पथ पर पेंग खूब भरते
भय नहीं करते, निर्भय होकर रहते
ठोकरों से जीवन के हर पाठ हम पढ़ते
गिरते हैं, उठते हैं, हँसते ही बढ़ते हैं
धीरज की धार लिए मन में ही गढ़ते हैं
उफ़ नहीं करते हैं, चुपचाप पीर सहते हैं
जीवट को जीवन का श्रृंगार हम कहते हैं
मासूमों के मर्म लिए हम चल पड़ते हैं
मुरझाए हुए तन में सुमन फिर खिलते हैं
बेटी की पंखुड़ियों में नए गीत भरते हैं
हर मुस्कान से उम्मीद के दीप जलते हैं।
सृजनकार:-
राहुल कुमार वर्मा (A.T)
बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश
Ps रतनपुर अखंडनगर सुल्तानपुर
ग्राम पसना अखंडनगर सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश 228171
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