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10/13/26

पैसा है तो इज़्ज़त है (कविता):- शबनम छिपा


   शीर्षक :- पैसों की परिभाषा  

पैसा है तो इज़्ज़त है,

पैसा ना हो तो बेइज़्ज़ती है।

पैसा है तो रिश्ते ज़रूरी,

पैसा ना हो तो रिश्तों में दूरी।

पैसा हो तो सलाम,

पैसा ना हो तो वालेकुम अस्लाम।

पैसा हो तो सम्मान,

पैसा ना हो तो अपमान।

पैसा है तो रिश्ते जुड़े,

पैसा ना हो तो रिश्ते टूटे।

पैसा हो तो अमीर,

पैसा ना हो तो हक़ीर।

पैसा हो तो सब कुछ है,

वरना इंसानियत भी नहीं—

आजकल की यही परिभाषा है

पैसों की।।

— Shabu ✍️

(गुजरात, सूरत)


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