प्रिय वार्डन
आप हो बहुत अच्छी
सबका रखती हो ख्याल
लेकिन खुद हो जाती बेहाल
मन में उदासी चेहरे पर मुस्कान
कल देखी वही पहचान !
जब आती हो
डर जाते सभी आप से
भूत, प्रेत, डायन से नहीं
ज्ञानी, बुद्धिमान, अनुभवी आ रहे
सभी को इस बात का डर था
कुछ पूछ न दें हम से !
सबको बोलती, बताती, समझाती हो
उतना हँसाती भी
माता-पिता की याद भुला देती
सबके दुखों में देती साथ
अपने दुखों में हो जाती बेहाल !
सृजनकार:- शिवानी, हजारीबाग
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