शीर्षक -पानी जैसा
पानी जैसा बना लू मैं,
अपना जीवन,
किसी प्यासे जीव की प्यास,
को शांत कर पाऊ में,
देवी -देव के चरणों को धो पाऊं,मैं,
पौधों की करू सुरक्षा मै,
उनमें,नया जीवन भर दूं मैं,
नदी- समुद्र में बहकर में,
पंछी की प्यास बुझाऊ मैं,
बनाकर पानी के जैसा उतर पाऊं ,
मन के भीतर में,
स्वच्छ निर्मल पानी सा,
अमल हृदय सा बन पाऊं में,
पानी जैसे सबकी चाहत में,
सबका मान बन पाऊं में,
पानी जैसे सौभाग्य को बना पाऊं मैं ।।
✍️ सुनीता बिश्नोई (राजस्थान)
स्वरचित एवं मौलिक और अप्रकाशित है।
धन्यवाद।
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