शीर्षक :- शिक्षा
अभी राह तो शुरू हुई है,
मंजिल काफि दूर है।
कलम उठाओ लक्ष्य साधो,
तुमको आगे बढ़ना है।।
सुरज जैसे धुप बिन,
चांदनी बिन चाँद आधुरें हैं।
वैसे हम तुम इस जीवन में,
बिन शिक्षा आधुरें हैं ।।
आ कदम से कदम मिला कर चल,
जीवन में ऐसा कुछ काम करो।
हो जग में रौशन नाम तेरा,
कुछ तो ऐसा काम करो ।।
सफलता रूपी फल,
जिस वृक्ष पर लगते हैं ।
परिश्रम रूपी वृक्ष पर,
मिठे फल उगते हैं।।
कार्य- सिध्दि का ध्रुव उपासक,
ही सफलता के शिखर पे चढ़ता है।
अपने इरादो को साकार करता,
निरंतर प्रयत्न करता हैं ।।
आओ हम सब संकल्प करें,
बिन शिक्षा नहीं रहना हैं।
हो जग में रौशन नाम मेरा,
कुछ तो ऐसा करना हैं।।
✍️ सिन्हा अंकित कृष्णा
( नवादा, बिहार)
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Very nice
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteOsm poem
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteहमें लिखनी है उन पर एक पूरी किताब.....
ReplyDeleteउनकी तारीफे चंद लफ़्ज़ों में हमसे बयां नहीं होंगी....!!!
होंठों की भी क्या मजबूरी होतीं हैं,
Deleteसब कुछ कह के भी बात अधूरी होतीं हैं.... 👀
होंठों की भी क्या मजबूरी होतीं हैं,
Deleteसब कुछ कह के भी बात अधूरी होतीं हैं.... 👀
बहुत खूब
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