9/12/26

मैं उसका इंतज़ार करती रही (कविता):- सपना यादव

 शीर्षक:- "धोखा" - सपना यादव 

मैं उस पर भरोसा करती रही,

वो हज़ारों झूठ मुझसे बोलता रहा।

अगर मैं कभी ज़िद करती थी जो,

“मैं तुम्हारा हूँ, सनम,” ये बोलता रहा।

वो सात जन्मों तक साथ रहने की कसम

खाता रहा, और एक जन्म भी साथ

रह न सका।

मैं उसका इंतज़ार करती रही,

वो किसी और की बाँहों में सोता रहा।

वो बोलता रहा, “शादी करूँगा,”

मैं उसके झूठ पर भरोसा करती रही।

मगर वो धोखा ऐसा दे गया,

मैं आज तक सदमे से निकल न सकी।

✍️ सपना यादव 

(उन्नाव, उत्तरप्रदेश)



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