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7/16/26

पग पग पर हैवान मिलेंगे(ग़ज़ल)- डॉ. मेहता नगेन्द्र

 हरित-ग़ज़ल:- डॉ. मेहता नगेन्द्र

पग पग पर हैवान मिलेंगे

मुश्किल से इन्सान मिलेंगे

मन्दिर के आगे होंगे सब

मतलब के हनुमान मिलेंगे

जंगल का रकबा घटने पर

पथरीले मैदान मिलेंगे

हरियाली के घर सन्नाटा

कांटों के गुलदान मिलेंगे

वैश्विक तापन, भू पर आफ़त

तेजस में दिनमान मिलेंगे

धरती पर उच्छ्वास पवन

सागर में तूफ़ान मिलेंगे

मौसम थोड़ा साथ निभाना

बादल जी हलकान मिलेंगे

रहना सचेत सदा 'मेहता'

संगम पर शैतान मिलेंगे

✍️ डॉ. मेहता नगेन्द्र 

(पटना, बिहार)


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