शीर्षक:- मूल्यवान अनंत प्रेम
मेरे नयन बड़े व्याकुल हैं
प्रीतम दरस को तरसत है ।
किस विधि मैं देखूं तुमको,,
मेरे नयन बरसत है।।
राह निहारु ,
आश लगाऊं।
तेरी प्रीत धुन मैं ,,
हर पल दोहराऊं।।
कल्पना कर मैं,
तेरी प्यारी छवि निहारू।
प्रेम वाटिका को मैं सजाऊ,,
तेरे प्रेम की मैं आश लगाऊं।।
साक्षी झा
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