6/23/26

मूल्यवान अनंत प्रेम (कविता) :- साक्षी झा

 शीर्षक:- मूल्यवान अनंत प्रेम

मेरे नयन बड़े व्याकुल हैं 

प्रीतम दरस को तरसत है ।

किस विधि मैं देखूं तुमको,,

 मेरे नयन बरसत है।।


राह निहारु ,

आश लगाऊं।

तेरी प्रीत धुन मैं ,,

हर पल दोहराऊं।।


कल्पना कर मैं,

तेरी प्यारी छवि निहारू।

प्रेम वाटिका को मैं सजाऊ,,

तेरे प्रेम की मैं आश लगाऊं।।


    साक्षी झा


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