“समकालीन कविता का एक नया तेवर निशा भास्कर की रचनाओं में दिखाई देता है” : सिद्धेश्वर
📍 पटना, 07 अप्रैल 2026
महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा प्रवर्तित मुक्तछंद का मूल उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करना था, न कि काव्यात्मकता का लोप करना। वर्तमान समय में जब नई पीढ़ी के रचनाकार पुनः छंद और लय की ओर उन्मुख होते दिखाई दे रहे हैं, तो यह हिंदी कविता के उज्ज्वल भविष्य का सकारात्मक संकेत है।
इसी सकारात्मक प्रवृत्ति का सशक्त उदाहरण कवयित्री निशा भास्कर की कविताएँ हैं। अब तक कहानी और लघुकथा के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर चुकी यह रचनाकार कविता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय संभावनाओं के साथ उपस्थित हैं। उनके गीतों और आज़ाद ग़ज़लों में सहजता, सरसता और भाव-सघनता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जो उन्हें समकालीन कवयित्रियों में विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।
उनकी कविताओं की एक प्रमुख विशेषता श्रृंगार का सहज और सौम्य चित्रण है। उदाहरणस्वरूप—
“धरते हो प्रिये पाँव जहाँ तुम,
खिल जाता है दिग-दिगंत।”
इसी क्रम में भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में यूट्यूब चैनल पर गूगल मीट के माध्यम से एक भव्य कवि गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के अध्यक्ष एवं गोष्ठी संयोजक सिद्धेश्वर ने अपने उद्बोधन में उपर्युक्त विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका निशा भास्कर ने प्रस्तुत कविताओं की सराहना करते हुए कहा कि समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में जहाँ एक ओर मुक्तछंद का व्यापक विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गीत, नवगीत और ग़ज़ल जैसी लयात्मक विधाओं की पुनर्वापसी अत्यंत महत्वपूर्ण और आश्वस्तकारी है।
इस अवसर पर जिन रचनाकारों की कविताएँ विशेष रूप से सराही गईं, उनमें प्रमुख हैं—
निलेश अय्याची, निशा भास्कर, अनीता मिश्रा ‘सिद्धि’, सिद्धेश्वर, गोविंद कुमार मिश्र, सुषमा मल्होत्रा (अमेरिका), नंदकुमार मिश्र, डॉ. अनुज प्रभात, साक्षी लोधी, पुष्प रंजन, अनीता पांडया, रशीद गौरी एवं इंदु उपाध्याय।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम प्रभारी अनीता मिश्रा ‘सिद्धि’ ने सभी प्रतिभागियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
📘 प्रस्तुति : बीना गुप्ता
