7/26/26

आपको आम लोगों से चुनकर आना बाकी है (ग़ज़ल):- बापुरे "किरण"



    ग़ज़ल 

आपको आम लोगों से चुनकर 

आना बाकी है 


अमीर,गरीब ,लाचारों का 

मसीहा बनना बाकी है 


हर पक्षधर के काफिलों में 

जंग छिडी है 


अपने हक़ की नयी सरकार 

लाना बाकी है  


कुछ लोग सिफारिश के साथ

रिश्वत देते हैं 


लगे से गले मिले हैं,अब हाथ 

मिलाना बाकी है 


सियासत किस ढंग से किस

ताल में चली है 


ज़माने से भरोसे का मेल

खाना बाकी है 


सब नेता ,अभिनेता,माता और 

पिता के हुनर से             


मिला कालाधन अब सफेद करना बाकी है 


बदले हैं रिश्ते नाते रस्मो-

रिवाज की बाते 


अपने साथ रही फितरत 

बदलांना बाकी है 


जिंदगी भर क्या से क्या 

नहीं खरीदा "किरण " 


बस अब हवा, धूप, छांव 

खरीदना बाकी है 


     ✍️ बापुरे "किरण "

(महाराष्ट्र)


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