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7/18/26

वो बस्ती ( कविता) :- साक्षी



 शीर्षक:- वो बस्ती :- साक्षी 

मुझे उस बस्ती में जाना अब,

जहां कष्ट न हो अपराध न हो।

प्रेम सिवाय अन्य शब्द न हो,,

मुझे उस बस्ती में जाना अब।।


जहां त्याग न हो बलिदान न हो,

जहां लोगों का मुझ पर अधिकार न हो ।

जहां सबका मान समान हो,,

मुझे उस बस्ती में जाना अब।।


जहां जाति - धर्म का भेद न हो,

जहां झूठ न हो इल्जाम न हो।

अपराध का कोई कारण न हो,,

मुझे उस बस्ती में जाना अब।।

     ✍️ साक्षी 

(सहरसा, बिहार)